मौसम की अनियमितता ने फसल को पहुंचाया भारी नुकसान
झालावाड़: लहसुन की फसल पर मौसम की मार, अच्छी कीमतों के बावजूद उत्पादन और गुणवत्ता में गिरावट
राजस्थान के झालावाड़ जिले (हाड़ौती क्षेत्र) में इस वर्ष लहसुन उत्पादक किसानों के लिए स्थिति मिली-जुली बनी हुई है। देश-विदेश में अपनी खास पहचान रखने वाले हाड़ौती के लहसुन पर फरवरी में अचानक बढ़े तापमान का बुरा असर पड़ा है, जिससे फसल की चमक और वजन दोनों कम हो गए हैं।
बाजार भाव और सप्लाई की स्थिति
मंडियों में लहसुन की आवक तो भरपूर है, लेकिन गुणवत्ता की कमी निर्यात में बाधा बन रही है।
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वर्तमान भाव: देशी लहसुन 3,000 से 12,000 रुपये और ऊटी किस्म का लहसुन 5,000 से 15,000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है।
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निर्यात में बाधा: खानपुर मंडी व्यापार संघ के अनुसार, क्वालिटी खराब होने के कारण अमेरिका, कजाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में होने वाली सप्लाई प्रभावित हुई है।
उत्पादन और लागत का गणित
इस सीजन में बुवाई का रकबा तो बढ़ा है, लेकिन प्रति बीघा पैदावार घट गई है।
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उत्पादन में कमी: किसानों के मुताबिक, जहाँ पिछले साल एक बीघा में 25-26 कट्टे लहसुन निकलता था, वहीं इस बार यह घटकर 20-22 कट्टे रह गया है।
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खेती का खर्च: एक हेक्टेयर में बुवाई से कटाई तक करीब 35 हजार रुपये का खर्च आता है। इसमें बीज, कीटनाशक और मजदूरी मुख्य व्यय हैं।
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पैदावार का औसत: इस बार प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन केवल 5 क्विंटल रहा है, जबकि बेहतर मुनाफे के लिए इसका 10-12 क्विंटल होना आवश्यक है।
पिछले कुछ वर्षों में बुवाई का रकबा (हेक्टेयर में)
लहसुन की खेती के प्रति किसानों का रुझान उतार-चढ़ाव भरा रहा है:
| सीजन | बुवाई क्षेत्र (हेक्टेयर) |
| 2022-23 | 15,676 |
| 2023-24 | 16,175 |
| 2024-25 | 24,666 |
| 2025-26 | 26,038 |
किसानों के सामने मुख्य चुनौतियां
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मौसम का मिजाज: फरवरी की गर्मी ने लहसुन की गांठों का आकार सही से विकसित नहीं होने दिया।
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MSP का अभाव: लहसुन न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के दायरे में नहीं आता, जिससे बाजार भाव गिरने पर किसानों को भारी जोखिम उठाना पड़ता है।
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भंडारण: नमी और गर्मी के कारण फसल के जल्दी खराब होने का डर बना रहता है।
