रोजमर्रा की फिटनेस के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग है बेहद फायदेमंद, शोध में दावा
आजकल खुद को फिट और सेहतमंद रखने के लिए लोग तरह-तरह के जतन करते हैं। कोई सुबह-सुबह लंबी सैर (मॉर्निंग वॉक) पर निकलता है, कोई दौड़ लगाता है, तो कोई योग और ध्यान (मेडिटेशन) के जरिए खुद को चुस्त-दुरुस्त रखता है। हाल ही में हुए एक बड़े वैज्ञानिक अध्ययन में यह बात सामने आई है। हालांकि, जब भी 'स्ट्रेंथ ट्रेनिंग' (वजन उठाने या रेजिस्टेंस एक्सरसाइज) की बात आती है, तो आम तौर पर लोग इसे केवल बॉडीबिल्डर्स या युवाओं के काम की चीज मानकर छोड़ देते हैं। लेकिन यह नया अध्ययन इस सोच को पूरी तरह बदलता है।
30 सालों तक चला महा-अध्ययन: 1.47 लाख लोगों के डेटा का विश्लेषण
इस ताजा शोध के परिणाम बेहद चौंकाने वाले और आंखें खोलने वाले हैं। वैज्ञानिकों ने लगभग 1.47 लाख लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण किया।
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लंबा अवलोकन: इन लोगों की शारीरिक गतिविधियों और एक्सरसाइज की आदतों पर करीब तीस साल (3 दशक) तक नजर रखी गई।
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अध्ययन का आधार: इस दौरान शोधकर्ताओं ने यह देखा कि कौन से लोग केवल कार्डियो (वॉक, रनिंग, साइकिलिंग) करते हैं, कौन सिर्फ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करते हैं और कौन इन दोनों का संतुलन बनाकर चलते हैं।
अध्ययन में साफ हुआ कि जो लोग नियमित रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करते हैं, उनमें दिल की बीमारियों (हार्ट अटैक), कैंसर और समय से पहले होने वाली असमय मौत का खतरा बेहद कम पाया गया।
जिम में घंटों पसीना बहाने की जरूरत नहीं: हफ्ते में डेढ़ से दो घंटे ही काफी
समय सीमा और फायदे: रिसर्च के अनुसार, इस एक्सरसाइज का पूरा लाभ उठाने के लिए आपको जिम में कई-कई घंटे बिताने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। हफ्ते में सिर्फ 90 से 120 मिनट (यानी लगभग डेढ़ से दो घंटे) की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग ही शरीर को बीमारियों से बचाने के लिए सबसे ज्यादा असरदार पाई गई। आंकड़ों से पता चला कि जो लोग इससे ज्यादा समय तक वेट ट्रेनिंग करते हैं, उन्हें कोई अतिरिक्त या बहुत ज्यादा फायदा नहीं मिलता। वहीं, जो लोग बहुत कम समय के लिए भी वजन उठाते हैं, उन्हें भी कुछ हद तक इसका लाभ जरूर मिलता है।
सबसे बेस्ट कॉम्बिनेशन: जब कार्डियो के साथ मिली स्ट्रेंथ ट्रेनिंग
इस रिसर्च का सबसे महत्वपूर्ण और दिलचस्प पहलू यह रहा कि सबसे बेहतरीन स्वास्थ्य उन लोगों का देखा गया, जिन्होंने कार्डियो और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग दोनों को अपने रूटीन में शामिल किया।जो लोग वॉकिंग, रनिंग या साइकिलिंग करने के साथ-साथ हफ्ते में दो दिन हल्की वेट ट्रेनिंग भी करते थे, उनकी सेहत सबसे शानदार थी। ऐसे सजग लोगों में मृत्यु का जोखिम उन लोगों की तुलना में 50 प्रतिशत तक कम पाया गया, जो बिल्कुल भी व्यायाम नहीं करते थे।
वैज्ञानिकों ने इसके पीछे का कारण समझाते हुए बताया कि:
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कार्डियो एक्सरसाइज: हमारे दिल और फेफड़ों को मजबूत बनाती है और पूरे शरीर में रक्त संचार (ब्लड सर्कुलेशन) को बेहतर करती है।
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स्ट्रेंथ ट्रेनिंग: हमारी मांसपेशियों (मसल्स), हड्डियों के घनत्व (बोन डेंसिटी) और शरीर की वास्तविक ताकत को बुढ़ापे तक बनाए रखती है।
जब ये दोनों एक्सरसाइज एक साथ मिलती हैं, तो शरीर को बीमारियों के खिलाफ एक सुरक्षा कवच मिल जाता है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने अंत में यह भी स्पष्ट किया कि यह एक ऑब्जर्वेशनल (अवलोकन आधारित) स्टडी थी, जिसमें लोगों ने अपनी एक्सरसाइज की जानकारी खुद दी थी, इसलिए इसमें मामूली त्रुटि की गुंजाइश हो सकती है। लेकिन कुल मिलाकर निष्कर्ष यही है कि बढ़ती उम्र में भी खुद को जवान रखने के लिए थोड़ा वजन उठाना बेहद जरूरी है।
