राजस्थान हाई कोर्ट का फैसला, आसाराम की जमानत 25 मई तक बढ़ी
जोधपुर। यौन उत्पीड़न के मामले में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे स्वयंभू संत आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जोधपुर उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने उनके स्वास्थ्य को आधार मानते हुए उनकी अंतरिम जमानत की अवधि 25 मई 2026 तक या उनकी अपील पर अंतिम फैसला आने तक के लिए बढ़ा दी है। यह महत्वपूर्ण निर्णय कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति संगीता शर्मा की पीठ द्वारा दिया गया।
बचाव पक्ष की दलीलें
आसाराम की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत और यशपाल सिंह राजपुरोहित ने अदालत के समक्ष निम्नलिखित पक्ष रखे:
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स्वास्थ्य की स्थिति: बढ़ती आयु और पुरानी बीमारियों के कारण आसाराम को लगातार चिकित्सा निगरानी की आवश्यकता है। वह अक्टूबर 2025 से ही अंतरिम जमानत पर बाहर रहकर अपना इलाज करा रहे हैं।
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इलाज में बाधा: वकीलों ने तर्क दिया कि यदि जमानत नहीं बढ़ाई गई, तो चल रहा उपचार बीच में रुक जाएगा और उन्हें जेल वापस जाना पड़ेगा।
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अपील पर फैसला: अदालत को यह भी बताया गया कि सजा के विरुद्ध दायर अपील पर 20 अप्रैल 2026 को सुनवाई पूरी हो चुकी है और हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक चौधरी ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जेल प्रशासन की ओर से समय-समय पर आसाराम को सभी आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं और उनके उपचार में प्रशासन की ओर से कोई कोताही नहीं बरती गई है।
राहत के साथ सख्त शर्तें
अदालत ने जमानत अवधि बढ़ाते हुए कुछ सख्त शर्तें भी लागू की हैं, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे:
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निगरानी में बदलाव: पूर्व में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय शर्तों को बरकरार रखा गया है, हालांकि तीन कांस्टेबलों की निरंतर निगरानी वाली शर्त में थोड़ी ढील दी गई है।
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गतिविधियों पर रोक: जमानत के दौरान आसाराम केवल इलाज करा सकेंगे। उन्हें किसी भी तरह के धार्मिक प्रवचन, भीड़ जुटाने या अनुयायियों को संबोधित करने की अनुमति नहीं होगी।
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देश छोड़ने पर पाबंदी: वह बिना अनुमति के देश से बाहर नहीं जा सकेंगे।
