कोटा। राजस्थान के कोटा बाईपास पर पर्यावरण संरक्षण के नाम पर विकसित की जा रही ग्रीन बेल्ट परियोजना में बड़े पैमाने पर वित्तीय धांधली और घोर लापरवाही का खुलासा हुआ है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कैम्पा फंड और सरकारी बजट के कथित दुरुपयोग, फर्जी बिलों के जरिए राशि निकालने और निष्फल रहे पौधरोपण पर कड़ा संज्ञान लिया है। अधिकरण ने राज्य के पर्यावरण विभाग और प्रधान मुख्य वन संरक्षक को दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने तथा गबन की गई पूरी राशि की रिकवरी करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।

हजारों पौधों के रोपण का दावा, मौके पर मिले शून्य पौधे

निरीक्षण रिपोर्टों के हवाले से यह बात सामने आई है कि कोटा बाईपास के लिए अधिग्रहित वन भूमि पर हरित पट्टी विकसित करने की योजना पूरी तरह धराशायी हो गई। एक स्थान पर अभिलेखों में 10 हजार पौधे लगाने का दावा ठोका गया था, किंतु भौतिक सत्यापन के दौरान वहां एक भी पौधा जीवित अवस्था में नहीं मिला। इसी तरह अन्य खंडों में भी 21 लाख रुपये से अधिक की राशि केवल रखरखाव के नाम पर कागजों में खर्च कर दी गई, जबकि धरातल पर पौधरोपण का अस्तित्व ही गायब पाया गया।

गड्ढों और पौधों की संख्या में मिला बड़ा विरोधाभास

जांच रिपोर्ट में अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। अभिलेखों के अनुसार जुलाई 2022 में 8 हजार पौधे रोपने की बात दर्ज है, जबकि उसी समयावधि के तैयार बिलों में मात्र 5,500 गड्ढे खोदने का उल्लेख किया गया है। एनजीटी ने इस विसंगति को फर्जी बिलिंग और सरकारी धन के गबन का प्रत्यक्ष प्रमाण माना है। इसके अलावा, एक ही मार्ग के रख-रखाव के नाम पर दो अलग-अलग बिल तैयार कर दोहरी राशि वसूलने का मामला भी उजागर हुआ है।

नियम विरुद्ध कार्य और वन भूमि पर अवैध निर्माण

अधिकरण ने पाया कि जल संकट से जूझ रहे क्षेत्र में मानसून के बीते जाने के बाद गलत समय पर पौधरोपण दर्शाया गया, ताकि विफलता का बहाना बनाया जा सके। वहीं पथरीली भूमि पर पौधरोपण के लिए निर्धारित मॉडल का पालन नहीं किया गया और ठेकेदारों की लापरवाही पर भी लीपापोती की गई। हद तो तब हो गई जब वन भूमि पर बिना प्रशासनिक अनुमति के सड़क का निर्माण तक कर दिया गया, जिससे रोपे गए पौधों को भारी नुकसान पहुंचा। राज्य सरकार ने अब इस समूचे घटनाक्रम पर वन विभाग से विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली है।