वैज्ञानिकों की बड़ी कामयाबी, अंतरिक्ष का रहस्य उजागर
वाशिंगटन। अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में खगोलविदों ने एक ऐसी ऐतिहासिक सफलता हासिल की है, जिसकी केवल कल्पना वैज्ञानिक पिछले पांच दशकों से कर रहे थे। वैज्ञानिकों ने पहली बार हमारी आकाशगंगा 'मिल्की वे' (Milky Way) के ठीक बीचों-बीच मौजूद महाविशाल ब्लैक होल से निकलने वाली अत्यधिक शक्तिशाली हवाओं के सीधे और पुख्ता सबूत ढूंढ निकाले हैं। इस खोज ने ब्लैक होल के रहस्यमयी व्यवहार और आकाशगंगाओं के निर्माण व विकास को समझने की दिशा में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। हमारी आकाशगंगा के इस केंद्रीय सुपरमैसिव ब्लैक होल को वैज्ञानिक भाषा में सैजिटेरियस ए-स्टार (Sgr A∗ ) कहा जाता है।
क्या हैं 'ब्लैक होल विंड्स' और यह कैसे बनती हैं?
आम तौर पर माना जाता है कि ब्लैक होल अपने अत्यधिक गुरुत्वाकर्षण के कारण प्रकाश सहित हर चीज को अपने अंदर निगल लेते हैं। लेकिन वैज्ञानिक सिद्धांतों के अनुसार, ब्लैक होल केवल पदार्थ का भक्षण ही नहीं करते, बल्कि ऊर्जा का उत्सर्जन भी करते हैं। जब अंतरिक्ष की गैस और ब्रह्मांडीय धूल ब्लैक होल की तरफ तेजी से खिंचती है, तो घर्षण और प्रचंड गुरुत्वाकर्षण के कारण वहां अत्यधिक ऊर्जा पैदा होती है। यही ऊर्जा आसपास मौजूद तैरते पदार्थों को बाहर की तरफ एक तेज रफ्तार से धकेलती है, जिसे वैज्ञानिक 'ब्लैक होल विंड्स' (Black Hole Winds) कहते हैं। सैजिटेरियस ए-स्टार अपेक्षाकृत शांत रहने के बावजूद इस तरह की हवाएं पैदा कर रहा है।
अल्मा और चंद्रा वेधशाला के डेटा से हुआ बड़ा खुलासा
इस अनसुलझे रहस्य से पर्दा उठाने के लिए खगोलविदों ने चिली के रेगिस्तान में स्थित 'अटाकामा लार्ज मिलीमीटर/सबमिलीमीटर एरे' (ALMA) वेधशाला के पांच साल के आंकड़ों का बारीकी से अध्ययन किया। 66 एडवांस रेडियो एंटेना से लैस इस वेधशाला की मदद से वैज्ञानिकों को ब्लैक होल के करीब ठंडी आणविक गैस के बीच लगभग तीन प्रकाश-वर्ष लंबी एक त्रिकोणीय (शंक्वाकार) खाली जगह दिखाई दी। शुरुआत में लगा कि यह तारों की हवाओं का असर है, लेकिन गणनाओं ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद जब नासा की 'चंद्रा एक्स-रे वेधशाला' के डेटा को अल्मा के डेटा के साथ मिलाया गया, तो साफ हुआ कि उस खाली स्थान से एक्स-रे निकल रही थीं, जिसने ब्लैक होल से निकलने वाली गर्म हवाओं की मौजूदगी पर अंतिम मुहर लगा दी।
पृथ्वी से दूरी और शांत ब्लैक होल का अनोखा व्यवहार
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ब्लैक होल से निकलने वाली यह अदृश्य आंधी पिछले करीब 20 हजार वर्षों से लगातार बह रही है। हालांकि, इससे हमारी पृथ्वी या सौर मंडल को डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, क्योंकि यह ब्लैक होल हमसे लगभग 26 हजार प्रकाश-वर्ष की सुरक्षित दूरी पर स्थित है। यह खोज इसलिए सबसे अलग है क्योंकि अब तक का अधिकांश शोध अत्यधिक सक्रिय और हिंसक ब्लैक होलों पर ही होता आया है। सैजिटेरियस ए-स्टार के जरिए वैज्ञानिकों को पहली बार यह समझने का मौका मिला है कि एक शांत और कम पदार्थ निगलने वाला ब्लैक होल अपने शांत काल में किस तरह काम करता है।
