कोटा। साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में कोटा पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने शहर में अवैध रूप से संचालित किए जा रहे तीन फर्जी कॉल सेंटरों का पर्दाफाश करते हुए गिरोह के पांच मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी जोधपुर, नागौर और बीकानेर के रहने वाले हैं। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार जोधपुर निवासी मोहम्मद अशफाक है, जिसने देश के बड़े महानगरों से ठगी के तौर-तरीके सीखकर कोटा में अपना ठिकाना बनाया था।

रोजगार का झांसा देकर युवतियों से कराई जाती थी कॉलिंग

डीएसपी के अनुसार, मुख्य आरोपी ने कोटा पहुंचकर गुमानपुरा इलाके में एक ऑफिस किराए पर लिया और अपने रिश्तेदारों व साथियों के साथ मिलकर फर्जी कॉल सेंटर का पूरा ढांचा खड़ा किया। गिरोह ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए नौकरियों का विज्ञापन देकर स्थानीय युवतियों को काम पर रखा। आरोपी का मानना था कि आम लोग पुरुषों की तुलना में महिलाओं की बातों पर जल्दी भरोसा कर लेते हैं। इन कॉलिंग एजेंट्स के माध्यम से लोगों से संपर्क साधकर उन्हें लुभावने निवेश और मोटे रिटर्न का लालच देकर ठगी का शिकार बनाया जाता था।

फर्जी विदेशी वेबसाइट और प्रमाण पत्रों से जीतते थे भरोसा

जांच एजेंसियों से बचने और खुद को प्रामाणिक साबित करने के लिए गिरोह ने एक बेहद शातिराना योजना तैयार की थी। उन्होंने एक फर्जी वेबसाइट बनवाकर उसका डोमेन विदेश में पंजीकृत कराया ताकि भारतीय पुलिस और जांच एजेंसियां उसकी तह तक न पहुंच सकें। इसके साथ ही, निवेशकों को झांसे में लेने के लिए कंपनी के नाम पर नकली विदेशी प्रमाण पत्र और दस्तावेज भी तैयार किए गए थे, जिनके आधार पर लोगों को सुरक्षित निवेश का झांसा दिया जाता था।

भारी मात्रा में उपकरण बरामद और आगामी कार्रवाई

पुलिस ने छापेमारी के दौरान आरोपियों के कब्जे से 102 मोबाइल फोन, 11 लैपटॉप, डेस्कटॉप, हार्ड डिस्क, ठगी के हिसाब-किताब की डायरियां और लगभग 65 हजार रुपये की नकदी जब्त की है। मामले में मोहम्मद अशफाक, आवेश, सैयद अली, जावेद अली और मजीद खान को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस अब इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तकनीकी जांच कर रही है और गिरोह के वित्तीय लेनदेन तथा अन्य सहयोगियों का सुराग जुटाने में लगी है।