मरीजों को बेहतर इलाज देने के लिए दिल्ली सरकार का बड़ा कदम
दिल्ली। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत और आधुनिक बनाने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरु तेग बहादुर अस्पताल (जीटीबी), दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (डीएससीआई) और राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल (आरजीएसएसएच) को एकीकृत कर एम्स की तर्ज पर एक स्वायत्त चिकित्सा संस्थान बनाने की घोषणा की है। साथ ही इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज (इहबास) को भविष्य में निमहंस-2 के रूप में विकसित करने की योजना पर भी काम शुरू किया जाएगा। सरकार की ओर से कहा गया है कि वे दिल्ली को चिकित्सा का बड़ा केंद्र बनाना है। सचिवालय में हाल ही में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की इस विषय पर चर्चा हुई थी। इसमें दिल्ली के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों को एकीकृत कर एक मजबूत और आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था बनाने के प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए उपलब्ध संसाधनों का वैज्ञानिक और प्रभावी उपयोग जरूरी है। इसके लिए अलग-अलग संस्थानों के एकीकरण से डॉक्टरों, विशेषज्ञों, उपकरणों और बुनियादी ढांचे का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
अस्पतालों में बेड और मरीजों का दबाव घटेगा
बैठक में अस्पतालों में उपलब्ध बिस्तरों की स्थिति और मरीजों के बढ़ते दबाव पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि कुछ अस्पतालों में मरीजों का दबाव बहुत अधिक है, जबकि कुछ अस्पतालों की क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में कुल 650 बेड की क्षमता है, लेकिन वर्तमान में करीब 250 बेड ही उपयोग में हैं और करीब 400 बेड खाली हैं। दूसरी ओर जीटीबी अस्पताल में मरीजों की संख्या काफी अधिक है। यहां करीब 1400 बेड की मूल क्षमता के मुकाबले 1500 से अधिक बेड का उपयोग किया जा रहा है। मरीजों के आंकड़ों के मुताबिक जीटीबी अस्पताल की ओपीडी में हर साल करीब 14 लाख से अधिक मरीज आते हैं और करीब 95 हजार मरीज आईपीडी सेवाएं लेते हैं। वहीं दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में करीब 1.27 लाख ओपीडी मरीज आते हैं और राजीव गांधी अस्पताल में करीब 2.87 लाख ओपीडी मरीज दर्ज किए गए हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जीटीबी अस्पताल पर मरीजों का दबाव ज्यादा है, जबकि अन्य अस्पतालों की क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।
सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं सबको मिलेंगी
मुख्यमंत्री ने बताया कि तीनों अस्पतालों के एकीकरण के बाद विभिन्न सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का सुव्यवस्थित वितरण किया जाएगा। प्रस्ताव के मुताबिक राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में कार्डियोलॉजी, पल्मोनोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, गैस्ट्रो सर्जरी, नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, रूमेटोलॉजी और क्लीनिकल हेमेटोलॉजी जैसी सेवाओं को मजबूत किया जाएगा। दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट को कैंसर उपचार का प्रमुख केंद्र बनाया जाएगा, जहां रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, न्यूक्लियर मेडिसिन, पेलिएटिव केयर और रेडियो इमेजिंग जैसी सेवाओं को एकीकृत किया जाएगा। वहीं गुरु तेग बहादुर अस्पताल में ऑर्थोपेडिक्स, इंटरनल मेडिसिन, ईएनटी, जनरल सर्जरी, न्यूरोसर्जरी, एंडोक्रिनोलॉजी और नेत्र रोग जैसे विभागों को और मजबूत किया जाएगा।
महंगे चिकित्सा उपकरणों का होगा बेहतर उपयोग
बैठक में तय किया कि कई अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा उपकरण मौजूद हैं, लेकिन विशेषज्ञ स्टाफ की कमी और संसाधनों के बिखरे होने के कारण उनका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। उदाहरण के लिए राजीव गांधी अस्पताल में उन्नत ब्रोंकोस्कोपी सुविधा उपलब्ध है, दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में रेडियोथेरेपी के लिए लीनियर एक्सीलेरेटर मौजूद है, राजीव गांधी अस्पताल में कैथ लैब और इको लैब हैं, जबकि जीटीबी अस्पताल में बोन बैंक जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। सरकार का कहना है कि एकीकृत व्यवस्था के तहत इन सभी महंगे उपकरणों का समन्वित और बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे मरीजों को अधिक प्रभावी उपचार मिल सकेगा।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा निमहंस-2
दिल्ली सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज (इहबास) को बंगलूरू के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निमहंस) की तर्ज पर विकसित करने की योजना बना रही है। इस योजना के तहत इहबास अपनी करीब 75 एकड़ खाली भूमि गुरु तेग बहादुर अस्पताल को उपलब्ध कराएगा, ताकि यहां एक विशाल एकीकृत चिकित्सा संस्थान विकसित किया जा सके। इहबास के पास कुल 111.69 एकड़ भूमि है, जिसमें से बड़ा हिस्सा अभी खाली है और भविष्य के विस्तार के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। वर्तमान में संस्थान का अस्पताल भवन करीब 19.9 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। सरकार की योजना के मुताबिक पुराने और जर्जर भवनों की जगह आधुनिक स्वास्थ्य ढांचा तैयार किया जाएगा। इस परियोजना के तहत नए हॉस्टल, अत्याधुनिक लैब, पैथोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री सुविधाएं, ऑडिटोरियम और लेक्चर थिएटर बनाए जाएंगे।
