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रियाद : मोदी 3.0 सरकार के पहले संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर जहां कई मंत्रियों की छुट्टी होने की अटकलें लगाई जा रही हैं, वहीं शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के भविष्य को लेकर भी चर्चाएं गर्म हैं। हाल ही में हुए नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक विवाद के बाद सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक उनके इस्तीफे की मांग उठ रही है। हालांकि, राजनीतिक जानकारों और वर्तमान परिस्थितियों के आकलन के अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान का मंत्री पद सुरक्षित रहेगा। ज्यादा से ज्यादा उनका विभाग बदला जा सकता है, लेकिन उन्हें मंत्रिमंडल से हटाए जाने की संभावना न के बराबर है।
क्यों लग रही हैं धर्मेंद्र प्रधान को हटाए जाने की अटकलें
धर्मेंद्र प्रधान को घेरे जाने की सबसे बड़ी वजह हालिया पेपर लीक मामला है, जिसने देश भर के छात्रों और अभिभावकों में भारी आक्रोश पैदा किया। विपक्ष इस मुद्दे पर लगातार हमलावर है। इसके अलावा, हाल ही में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) नामक संगठन ने कई शहरों में उनके इस्तीफे को लेकर प्रदर्शन किया है। वहीं, लद्दाख के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर इस मांग के समर्थन में भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। इससे पहले यूजीसी (UGC) के एक सर्कुलर को लेकर भी प्रधान विवादों में आए थे, जिससे सरकार पर उन्हें हटाने का चौतरफा दबाव बनता दिख रहा है।
दबाव की राजनीति के आगे नहीं झुकता मोदी नेतृत्व
राजनीतिक इतिहास गवाह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी भी विपक्ष या किसी आंदोलन के दबाव में आकर अपने मंत्रियों के इस्तीफे नहीं लिए हैं। पूर्व में केवल एमजे अकबर का अपवाद सामने आया था, लेकिन वह मामला कामकाजी कमियों का नहीं बल्कि 'मी टू' आंदोलन के दौरान लगे व्यक्तिगत यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा था। वर्तमान में चल रहे सीजेपी के प्रदर्शन या सोनम वांगचुक के आंदोलन का असर उस स्तर का नहीं दिखाई देता। वांगचुक ने पिछले साल लद्दाख में भी 15 दिनों की भूख हड़ताल की थी, जिसके बाद उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत छह महीने जेल में भी रहना पड़ा था। ऐसे में प्रधानमंत्री किसी भी आंदोलन के सामने झुकने का संदेश देना पसंद नहीं करेंगे।
सरकारी एजेंडे और नई शिक्षा नीति पर बेहतर काम
धर्मेंद्र प्रधान के पद पर बने रहने की एक बड़ी वजह यह भी है कि वे सरकार और संगठन के एजेंडे को बेहद प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा रहे हैं। उनके कार्यकाल में एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिनमें आपातकाल और मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) जैसे विषयों को जोड़ा गया है, जबकि गुजरात दंगे, फैज की कविताएं और मुगल शासकों से जुड़े कुछ हिस्सों को हटाया गया है। हाल ही में 26 जून को धर्मेंद्र प्रधान के 57वें जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर पोस्ट कर राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लागू करने की दिशा में उनके काम की खुलकर सराहना की थी, जो उनके मजबूत कद को दर्शाता है।
पेपर लीक पुराना ढर्रा और गाज गिरने की कोई नजीर नहीं
भले ही विपक्ष पेपर लीक को वर्तमान सरकार की नाकामी बता रहा हो, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि यह समस्या दशकों पुरानी है। साल 2002 से 2025 के बीच देश में पेपर लीक के करीब 45 बड़े मामले सामने आ चुके हैं। वहीं, 2015 के बाद से परीक्षाओं में गड़बड़ी के लगभग 150 मामले दर्ज हुए हैं। इन मामलों का इतिहास देखें तो शायद ही कभी किसी बड़े राजनेता या उच्च अधिकारी पर बड़ी गाज गिरी हो। पिछले 11 सालों में केवल एक ही मामले में अदालत से सजा हो पाई है। इस प्रशासनिक ढर्रे को देखते हुए केवल पेपर लीक के आधार पर धर्मेंद्र प्रधान की छुट्टी कर दी जाएगी, इसकी उम्मीद बेहद कम है।
