भोजशाला केस में आज आएगा बड़ा फैसला, कानून व्यवस्था पर प्रशासन की नजर
धार (मध्य प्रदेश): ऐतिहासिक और विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद मामले में आज 15 मई को इंदौर हाईकोर्ट की डबल बेंच अपना महत्वपूर्ण फैसला सुना सकती है। लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया और वैज्ञानिक साक्ष्यों के संकलन के बाद, अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। इस संभावित फैसले को देखते हुए प्रशासन और याचिकाकर्ता पक्ष दोनों ही पूरी तरह सतर्क हैं।
अदालत में हिंदू पक्ष के मजबूत दावे और साक्ष्य
अप्रैल माह में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं—विष्णु शंकर जैन, विनय जोशी और आशीष गोयल—ने भोजशाला को मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर और विद्या केंद्र होने के पक्ष में विस्तृत दलीलें पेश कीं। हिंदू पक्ष ने अपने दावों को पुख्ता करने के लिए एएसआई सर्वे की रिपोर्ट, ऐतिहासिक शिलालेख, स्तंभों पर उकेरी गई आकृतियों और संस्कृत के प्राचीन अवशेषों को बतौर सबूत पेश किया। उनके अनुसार, ब्रिटिशकालीन गजेटियर और इतिहासकारों के दस्तावेज़ भी इस परिसर के मूल स्वरूप को मंदिर के रूप में ही परिभाषित करते हैं।
2022 से अब तक: याचिकाओं और सर्वे का सफर
इस विवाद की वर्तमान कानूनी लड़ाई साल 2022 में तब शुरू हुई, जब 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' की ओर से रंजना अग्निहोत्री ने याचिका दायर कर परिसर के धार्मिक स्वरूप को स्पष्ट करने की मांग की थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए साल 2024 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने यहाँ 98 दिनों तक गहन वैज्ञानिक सर्वे किया। गौरतलब है कि इसी साल 23 जनवरी 2026 को वसंत पंचमी के पावन अवसर पर सुप्रीम कोर्ट ने परिसर में निर्बाध पूजा की अनुमति देकर एक बड़ा पड़ाव तय किया था।
शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील
फैसले की गंभीरता को देखते हुए याचिकाकर्ता पक्ष ने एक वीडियो संदेश जारी कर आम जनता से संयम बरतने का आग्रह किया है। उन्होंने सभी समुदायों से अपील की है कि न्यायपालिका के निर्णय का सम्मान करें और आपसी सौहार्द को किसी भी कीमत पर प्रभावित न होने दें। साथ ही, वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने मध्य प्रदेश के डीजीपी और धार एसपी से संपर्क कर जिले में पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात करने और कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है ताकि फैसले के बाद की स्थिति शांतिपूर्ण बनी रहे।
