भोपाल नगर निगम में कथित फर्जी बिल घोटाले और नियम-विरुद्ध तैनाती को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है
भोपाल। भोपाल नगर निगम में कथित फर्जी बिल घोटाले और नियम-विरुद्ध तैनाती को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। प्रभारी उप आयुक्त चंचलेश गिरहरे की नियुक्ति और उन्हें महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार देने पर पहले ही सवाल उठ चुके थे, और अब लोकायुक्त की FIR के बाद मामला और गंभीर हो गया है अगस्त 2025 में इस प्रकरण को लेकर EOW में शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत चंचलेश गिरहरे को नियमों के खिलाफ संवेदनशील शाखाओं का दायित्व सौंपा गया। शिकायत में यह भी कहा गया था कि तकनीकी पद से प्रशासनिक जिम्मेदारियों तक पहुंचने की प्रक्रिया में आवश्यक अनुमति और औपचारिकताओं की अनदेखी की गई इसके बाद मार्च 2026 में लोकायुक्त पुलिस ने भोपाल नगर निगम की सेंट्रल वर्कशॉप और वित्त शाखा पर छापेमारी की। रिपोर्टों के मुताबिक, SAP सॉफ्टवेयर के जरिए फर्जी ई-बिल तैयार कर बिना वास्तविक कार्य कराए करोड़ों रुपये के भुगतान किए जाने का संदेह है इसी मामले में अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर और चंचलेश गिरहरे समेत अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी की धाराओं में कार्रवाई की गई है लोकायुक्त टीम ने छापे के दौरान दस्तावेजों और डिजिटल डेटा की जांच की और कई अहम रिकॉर्ड जब्त किए जांच एजेंसी के अनुसार, मामला केवल वित्तीय अनियमितता का नहीं, बल्कि संस्था के भीतर प्रणालीगत गड़बड़ी का भी संकेत देता है सबसे अहम सवाल यह है कि FIR दर्ज होने के बावजूद संबंधित अधिकारियों से प्रभार क्यों नहीं छीने गए और प्रशासन ने अब तक क्या कदम उठाए हैं। शिकायतकर्ताओं की मांग है कि जांच जल्द पूरी की जाए, जिम्मेदार अफसरों पर सख्त कार्रवाई हो और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष समीक्षा की जाए

क्यों अहम है मामला
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें नियुक्ति, वित्तीय स्वीकृति, विभागीय नियंत्रण और सार्वजनिक धन के उपयोग — चारों स्तरों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह नगर निगम की आंतरिक निगरानी प्रणाली और जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न होगा
